Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Mauhharam and all Wafaats
Nauhas
   
  यकुम महोर्रम
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एै मोमिनो जिस माह में मारे गए सरवर - उसकी है यकुम आज
जिस माह में सर नंगे फिरीं जैनबे गुज़तर - उसकी है यकुम आज
मशकीज़ा सकीना का लिये नहर पर आके - शानो को कटा के
जिस माह में मारे गए अब्बासे दिलावर - उसकी है यकुम आज
बादे रुफाक़ा कत्ल के मैदान मे आके - बरछी की अनी से
जिस माह में मारे गए हम शक्ले पय्यम्बर - उसकी है यकुम आज
जन्गाह में हाथों पर शहे हर दोसरा के लब खुश्क दिखा के
जिस माह में बेशीर सिधारा सूए कौसर - उसकी है यकुम आज
जिस माह में सर तन से जुदा हो गया शह का - अफसोस की है जा
जिस माह में तर खूं से हुआ शिमर का ख़न्ज़र - उसकी है यकुम आज
सर पीटो मुहब्वों के शहे कौनों मकाँ की - सुल्ताने ज़माँ की
जिस माह में पामाल हुयी लाशे मुुताहर - उसकी है यकुम आज
जे़हरा व रसूले मदनी, हैदरो सफदर - और हज़रते शब्बर
जिस माह में बेचैन रहे कब्र के अन्दर - उसकी है यकुम आज
क्यों 'फिक्र' मर्होरम में भी क्या दिल को हो फरहत - एक गोना मसर्रत
जिस माह में मैं जाऊँगा कब्रे शहे दीं पर - उ सकी है यकुम आज

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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