Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  जनाबे फातेमा ज़हरा (अलै.)
Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats
  Nauha in Hindi Print Nauha in Urdu Print Nauha in Hindi
Print Nauha
Translation of Nauha
Listen to Nauha
Download Mobile Audio
View Nauha on YouTube
Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats
 

 

उठी है आज वह एै मोमिनो दुनिया से मासूमा
पदर के ग़म में आदा ने जिसे रोने से भी रोका

किए ऐसे जनाबे सैय्यदा पर ज़ु़लम दुनिया में
रहीं बादे नबी पच्चानवे दिन दहर में ज़हरा

समझ के बकसो - बेबस नबी ने बाद आदा ने
किया बागे़ फिदक भी गज़ब तोड़ा घर का दरवाजा

न बे इज़्न आया जिस घर में मलक दर आये वाँ नारी
गला बांधा अली का मिन्नते करती रहीं ज़हरा

किए थे यू वसाया फात्मा ज़हरा ने हैदर से
के उन लोगों को मेरी लाश पर हरगिज़ न बुलवाना

तुम अपने हाथ से ग़ुस्लो कफ़न या बुल हसन देकर
पढ़ाना ख़ुद नमाज़ और दफ़्न करना खुद मेरा लाशा

न पड़ जाए नज़र न महरमों की मेरी मय्यत पर
शबे तारीक में ताबूत सुए क़ब्र ले जाना

ख़ता खि़दमत गुज़ारी में हुयी हो गर कोई मुझसे
समझकर अपनी लौंडी बहरे ख़ालिक अफ़ो कर देना

बड़ी मेहनत से चक्की पीस के पाला है बच्चों को
ख़्याल एै बुल हसन रखना मेरे बाद इन यसीरों का

अगर कोई ख़ता हो या अमरिल मोमिनीं इनसे
सज़ा देने से बे माँ का समझकर दर गुज़र करना

दिनों तारीखों साल एै 'फिक्र' यू रहलत का लिखा है
दो शमबा तीसरी माहे शशुम सन ग्यारह हिजरी था


Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
| Home | Fikr | Nauhas | Videos | Dictionary | Contact | YouTube | Privacy Policy | Terms & Conditions |