Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  तीन महोर्रम
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तीसरी माहे अज़ा की आयी जब एै मोमनीन
अर्श को जुमबिश हुयी, हिलने लगा चरखे बरीं

छोड़कर शहरे मदीना आए हैं कर्ब्रों बला
राक़िबे दोशे पय्यमब्र, रहमतुल - लिल आलेमीन

इस तरफ तो ख़ेमए एहले हरम होते हैं नज़्ब
चार सू से आ रहे हैं उस तरफ आदाए दीन

किस लिए यह हो रहा है कर्बला में अशदहाम
जंग पर आमादा है किससे यह अफवाजे लईन

उससे लड़ने के लिये आदाए दींन तैय्यार हैं
खुद समझते हैं जिसे दिल बन्दे ख़तमुल मुरसलीन

हलअता मौजूद है कुरआन में जिसके लिए
ज़ीनते अर्शे ख़ुदा है और इमाम-अल-मुतक़ीन

सैकड़ों खत भेजकर पहले तलब उसको किया
और अमादा है बहरे कत्ले अब आदाए दीन

मुनहरिफ सारा ज़माना हो गया मज़लूम से
तालिबे बैयत इमाम वक्त से हैं मुशरेकीं

ग़ैर की बैयत करे किस तरह फरज़न्दे रसूल
यह सितम कैसा है बोलो तो सही एै एहलेकीन

कर दुआ एै 'फिक्र' हक़ से फिर ज़ियारत हो नसीब
दम अगर निकले तो निज़दे रौज़ए सुल्ताने दीन

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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