Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  इमाम का बीसवाँ = (30 मुहर्रम)
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मेहमान जिसे मकर से आदा ने बुलाया है बीसवाँ उसका
प्यासा जिसे आशूर के दिन दश्त में मारा है बीसवाँ उसका

और तीन दिन अफसोस रही धूप में मय्यत बेदफ्न ज़मीं पर
सर जिसका था नैज़े पर लईनों ने चढ़ाया है बीसवाँ उसका

था सानिये जाफर जो अलमदारे हुसैनी दरिया के किनारे
शाने कटे जिसके सूए फिरदौस सिधारा है बीसवाँ उसका

जो मश्क सकीना की लिए नहर गया था अफसोस की है जा
आदा ने जिसे गुर्ज़े ग़राबार लगाया है बीसवाँ उसका

था चश्मे हुसैन इब्ने अली की जो बसारत और क़ल्ब की क़ुव्वत
खा कर जो सिना सीने पर फिरदौस सिधारा है बीसवाँ उसका

था सूरत-ब सीरत में जो हमशक्ले पयम्बर लख़्ते दिले सरवर
खुद जिस पर जवानी को सदा नाज़ रहेगा है बीसवाँ उसका

कमसिन जो लड़ा फ़ौज से इब्ने शहे ख़ैबर लख़्ते दिले शब्बर
पामाल हुआ फूल सा तन दश्त मंे जिसका है बीसवाँ उसका

मैदान में शह पानी पिलाने जिसे लाए दामन में छुपाए
आशूर के दिन तीर से जो नहर हुआ था है बीसवाँ उसका

रह जाएगी एै 'फिक्र' तेरे दिल में यह हसरत होगी न ज़ियारत
तू हिन्द से रौज़े पर न जिस शाह के पहुँचा है बीसवाँ उसका

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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