Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  हज़रत मुस्लिम इब्ने अक़ील
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दाखिले कूफ़ा हुआ जब नायबे सुलताने दीं
अज़रहे मक्र आए बैअत को हज़ारों मुशरकीन

ले ली बैअत कूफ़ियों से हज़रते मुस्लिम ने जब
नामा एक बहरे तलब भेजा सुए सुल्ताने दीन

बाद इसके हो गए सब अहले कूफ़ा मुनहरिफ़
और बराए क़त्ले मुस्लिम आ गई फ़ौजे लईन

आलमे तन्हाई शिद्दत प्यास की जाएँ कहाँ
अब कहीं ढूँढे से भी जाए अमाँ मिलती नहीं

इत्तेफ़ाक़न राह में जब ख़ानए तौआ मिला
तब कहा पानी पिला दे बहरे ख़त्मुल मुरसलीन

जाम पानी का पिला कर मोमिना ने बाअदब
आपसे नामो निशाँ पूछा बाआवाज़े हज़ीन

बादे इसरार उससे हालत बेकसी की जब कही
सुनते ही नाम अपने घर में ले गई वह पाकदीन

रात भर मेहमान रहे लड़के ने उसके सुबह को
हाकिमे कूफ़ा से कहकर भेज दी फौजेे लईन

घर से निकले सुनते ही घोड़ों के टापों की सदा
और खैंचीं तेग़ बहरे कत्ले फौजे मुशरकीन

हो गए जब आपसे मग़लूब वह मक्कार सब
करके ख़सपोश एक गढ़े को हट गए पीछे लईन

लड़ते-लड़ते हज़रते मुस्लिम गिरे उस ग़ार में
हमलावर नैज़ों से बेकस पर हुए आदाए दीन

बादे कत्ल एक रीसमा से पाए मय्यत बांधकर
खैंचते फिरते थे बाज़ारों में कूफ़े के लईन

कर दुआ ऐ 'फिक्र' ख़ालिक़ से के मर जाने के बाद
क़ब्र को मिल जाए निज़्दे रौज़ए मुस्लिम ज़मीन

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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